स्कूल में खराब मिड-डे मील, रसोइयों ने भी काम रोक दिया
मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी प्रखंड के अंतर्गत आने वाले उच्च माध्यमिक विद्यालय मुरौल में शुक्रवार को दोपहर के भोजन (मिड-डे मील) को लेकर भारी बवाल देखने को मिला। स्कूली बच्चों के लिए आपूर्ति किए गए भोजन और अंडों से तेज दुर्गंध आने की शिकायत मिलते ही परिजनों के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीण और स्कूल की रसोइयां भी बेहद गुस्से में आ गईं। जैसे-जैसे मौके पर विरोध प्रदर्शन और हंगामा बढ़ता गया, स्थिति को भांपते हुए विद्यालय प्रबंधन ने तुरंत कार्रवाई की और बच्चों के बीच खाने के वितरण पर पूरी तरह से रोक लगा दी।
बदबूदार अंडों की आपूर्ति से भड़का आक्रोश और अभिभावकों का कड़ा रुख
शुक्रवार को जब निर्धारित मीनू के अनुसार स्कूल में मिड-डे मील के लिए अंडे और अन्य खाद्य सामग्रियां पहुंचाई गईं, तो उनमें से एक असहनीय सड़न और बदबू आ रही थी। जैसे ही यह बात बच्चों से होते हुए स्कूल परिसर में मौजूद उनके अभिभावकों तक पहुंची, वैसे ही वहां अफरा-तफरी और नाराजगी का माहौल बन गया। बच्चों की सेहत को खतरे में पड़ता देख परिजनों ने उन्हें वह दूषित भोजन छूने से भी सख्त मना कर दिया, जिससे पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े हो गए।
भोजन की गिरती गुणवत्ता पर गंभीर आरोप और पुरानी व्यवस्था की मांग
स्थानीय नागरिकों और परिजनों ने स्कूल में खाना सप्लाई करने वाली संस्था (एनजीओ) की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बच्चों की थाली में परोसे जाने वाले भोजन का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि संस्था द्वारा भेजे जाने वाले खाने को लेकर पूर्व में भी कई बार शिकायतें सामने आ चुकी हैं और यदि इस लचर व्यवस्था में तुरंत सुधार नहीं किया गया, तो वे अपने बच्चों को घर से ही टिफिन देकर भेजेंगे। ग्रामीणों और स्कूल की रसोइयों ने सुर में सुर मिलाते हुए मांग की कि बाहरी एजेंसी के बजाय पहले की तरह स्कूल परिसर में ही स्थानीय रसोइयों की देखरेख में ताजा और पौष्टिक भोजन तैयार करवाया जाना चाहिए।
प्रधानाध्यापक का आश्वासन और जांच के घेरे में बाहरी संस्था
इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी बात रखते हुए विद्यालय के प्रधानाध्यापक ओम प्रकाश ने स्वीकार किया कि एनजीओ द्वारा दिए जा रहे भोजन को लेकर पहले भी शिकायतें आती रही हैं और शुक्रवार को अंडों से दुर्गंध आने की बात पूरी तरह सच है। उन्होंने आक्रोशित अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि इस लापरवाही की लिखित रिपोर्ट तुरंत संबंधित उच्चाधिकारियों और जिम्मेदार एनजीओ को भेजी जा रही है, क्योंकि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सरकारी स्कूलों की भोजन व्यवस्था की नियमित जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग काफी तेज हो गई है।

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