भारत में सोने की मांग बढ़ने से आयात पर असर पड़ा
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक संकट के बीच देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है। इस आर्थिक रणनीति का मुख्य उद्देश्य चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपये की गिरती कीमत को संभालना है। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आम जनता से आगामी एक वर्ष तक सोने की खरीदारी को टालने की भावुक अपील के बावजूद, अप्रैल महीने में घरेलू बाजार में पीली धातु के आयात में ऐतिहासिक उछाल देखा गया। ऊंची कीमतों के दौर में भी देश का स्वर्ण आयात एकाएक बयासी फीसदी के करीब बढ़कर 5.62 अरब डॉलर के पार पहुंच गया, जिसने आर्थिक नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है।
आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी और भविष्य में गिरावट की उम्मीद
इस बेकाबू होते आयात पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने एक बड़ा वित्तीय फैसला लेते हुए सोने और चांदी पर लगने वाली बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी को छह प्रतिशत से सीधे बढ़ाकर पंद्रह प्रतिशत कर दिया है। वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस टैक्स बढ़ोतरी का सीधा असर आने वाले महीनों में देखने को मिलेगा, जिससे घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की मांग और उपभोग दोनों में भारी कमी आने की संभावना है। सरकार को पूरी उम्मीद है कि इस कड़े कदम से भविष्य में आयात के आंकड़ों को नीचे लाने में मदद मिलेगी।
चांदी के आयात में रिकॉर्ड उछाल और व्यापार घाटे पर बढ़ता दबाव
वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक केवल सोने में ही नहीं, बल्कि चांदी के आयात में भी अप्रैल के दौरान एक सौ सत्तावन प्रतिशत से अधिक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जो बढ़कर 41.1 करोड़ डॉलर के स्तर पर पहुंच गई। सोने और चांदी के इस संयुक्त आयात विस्फोट के कारण देश का व्यापार घाटा पिछले तीन महीनों के उच्चतम स्तर यानी 28.38 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि चांदी का उपयोग औद्योगिक कार्यों में अधिक होने के कारण इस पर टैक्स वृद्धि का प्रभाव सोने की तुलना में थोड़ा कम रह सकता है।
वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी और भारतीय उपभोक्ताओं का दबदबा
अगर वैश्विक स्तर पर भारत के स्वर्ण व्यापार के समीकरणों को देखा जाए, तो देश की कुल सोने की जरूरतों का लगभग चालीस प्रतिशत हिस्सा अकेले स्विट्जरलैंड से पूरा होता है, जबकि इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और दक्षिण अफ्रीका का स्थान आता है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान यूएई से होने वाले आयात में मूल्य और मात्रा दोनों के लिहाज से कमी दर्ज की गई है, जिससे भारत के कुल स्वर्ण व्यापार में उसकी हिस्सेदारी थोड़ी घटी है। चीन के बाद दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ता के रूप में भारत में होने वाला यह अधिकांश आयात मुख्य रूप से हमारे विशाल आभूषण उद्योग की मांग को पूरा करने के लिए किया जाता है।

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