पुणे। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इबोला वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने भी सतर्कता बरतते हुए देश के सभी राज्यों के लिए एक विस्तृत दिशानिर्देश (गाइडलाइन) जारी किए हैं। केंद्र के इसी अलर्ट के बाद पुणे प्रशासन तुरंत हरकत में आया है और पुणे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विदेश से आने वाले यात्रियों की कड़ी मेडिकल स्क्रीनिंग और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि देश में इस खतरनाक वायरस के प्रवेश को रोका जा सके।

दुबई और बैंकॉक से आने वाले यात्रियों पर विशेष नजर

पुणे हवाई अड्डा प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से आने वाले यात्रियों की सघन थर्मल और मेडिकल स्क्रीनिंग कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, कनेक्टिंग फ्लाइट्स के जरिए संक्रमण फैलने के खतरे को देखते हुए विशेष रूप से दुबई और बैंकॉक से पुणे पहुंचने वाले मुसाफिरों पर पैनी नजर रखी जा रही है। इन रूटों से आने वाले हर एक यात्री की स्वास्थ्य जांच को अनिवार्य कर दिया गया है।

अब तक राहत: स्क्रीनिंग में नहीं मिला एक भी संदिग्ध मामला

पुणे एयरपोर्ट पर तैनात स्वास्थ्य अधिकारियों की ओर से राहत भरी खबर सामने आई है। जांच शुरू होने से लेकर अब तक की गई व्यापक स्क्रीनिंग के दौरान इबोला वायरस का एक भी पॉजिटिव या संदिग्ध मामला सामने नहीं आया है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षात्मक कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाए जा रहे हैं और नागरिकों को पैनिक होने (घबराने) की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है।

WHO ने घोषित किया इंटरनेशनल इमरजेंसी, भारत सरकार मुस्तैद

दरअसल, अफ्रीकी देशों में इबोला के बेकाबू होते हालातों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी) घोषित कर दिया है। इसी वैश्विक चेतावनी की पृष्ठभूमि में भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने त्वरित कदम उठाए हैं। पुणे हवाई अड्डे पर की जा रही यह सख्त एहतियाती कार्रवाई इसी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।