दिल्ली प्रदर्शन को लेकर राज ठाकरे ने BJP पर साधा निशाना, पुराने दौर की दिलाई याद
महाराष्ट्र:राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई धांधली और पेपर लीक के विरोध में विद्यार्थियों का उग्र आंदोलन लगातार जारी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्र सड़क पर डटे हुए हैं और सरकार पर नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने का भारी दबाव बना रहे हैं। इस राष्ट्रव्यापी मुद्दे पर अब विपक्षी दलों का समर्थन भी आंदोलित युवाओं को मिलने लगा है। इसी क्रम में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने केंद्र सरकार के कड़े रवैये पर तीखा हमला बोलते हुए पुरानी घटनाओं का हवाला दिया और प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
इस्तीफे की पुरानी परंपरा का हवाला देकर राज ठाकरे ने केंद्र सरकार को घेरा
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने केंद्र के रुख पर सवाल उठाते हुए याद दिलाया कि जब भारतीय जनता पार्टी विपक्ष की भूमिका में थी, तब वह विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर मंत्रियों और अधिकारियों के इस्तीफे की मांग प्रमुखता से उठाती थी। उन्होंने मुंबई 26/11 आतंकी हमले और रजा अकादमी विरोध प्रदर्शन के बाद हुए घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी प्रशासनिक व राजनीतिक पदों से इस्तीफे लिए गए थे। ठाकरे ने कहा कि वर्तमान स्थिति में मामला केवल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसकी आंच और नैतिक जवाबदेही सीधे प्रधानमंत्री के दरवाजे तक पहुंच चुकी है।
विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और सोनम वांगचुक के साथ व्यवहार पर जताया कड़ा आक्रोश
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों पर पुलिस बल प्रयोग और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाए जाने की घटना पर राज ठाकरे ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठा रहे युवाओं पर निर्ममता से लाठियां बरसाना यह दर्शाता है कि सत्ता में बैठे लोग जायज और लोकतांत्रिक विरोध को दबाने में गर्व महसूस कर रहे हैं। उन्होंने सरकार की इस दमनकारी सोच की कड़े शब्दों में आलोचना करते हुए इसे संवेदनहीनता की पराकाष्ठा करार दिया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर सरकार के रुख पर खड़े किए गंभीर सवाल
राज ठाकरे ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने की मांग को दोहराते हुए कहा कि सरकार को इस विषय पर अपनी हठधर्मिता त्याग देनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि धर्मेंद्र प्रधान ऐसे कौन से बड़े पद पर हैं कि उनका त्यागपत्र स्वीकार कर लेने से सरकार को अपनी व्यक्तिगत पराजय महसूस होने लगती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के लाखों छात्रों का भविष्य, उनका असंतोष और आक्रोश किसी भी मंत्री या सरकार के व्यक्तिगत अहंकार से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
'परीक्षा पे चर्चा' करने वाले प्रधानमंत्री से सीधे छात्रों के बीच जाकर संवाद करने का आग्रह
मनसे प्रमुख ने देश के शीर्ष नेतृत्व से सीधा सवाल करते हुए कहा कि जो प्रधानमंत्री हर साल विद्यार्थियों के साथ 'परीक्षा पे चर्चा' का आयोजन करते हैं, वे आज सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे छात्रों से सीधे बातचीत क्यों नहीं कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार को युवाओं की मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए और बातचीत के जरिए इस गतिरोध को तुरंत दूर करना चाहिए, न कि प्रशासनिक ताकत का इस्तेमाल करके युवाओं की बुलंद आवाज को दबाने का प्रयास करना चाहिए।

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