ईरान का बड़ा एक्शन, CIA और मोसाद से जुड़े जासूसों को दी फांसी
वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 10 हफ्तों से चल रही जंग को खत्म करने की उम्मीदों को उस वक्त करारा झटका लगा, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। रविवार को ईरान ने इस संघर्ष को थामने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव पेश किया था। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इस डील में लेबनान में जारी हिंसा को रोकने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील समुद्री रास्ते पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही का भरोसा दिया गया था। लेकिन जैसे ही यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस पहुंचा, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साफ कर दिया कि यह समझौता अमेरिका के हितों के अनुकूल नहीं है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
ईरान की सख्त शर्तें और ट्रंप का इनकार
ईरान ने इस प्रस्ताव के साथ अमेरिका के सामने कई कड़ी शर्तें भी रखी थीं। ईरान चाहता था कि अमेरिका युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा दे, उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंधों को तुरंत हटाए और ईरानी तेल की बिक्री पर लगी रोक को खत्म करे। इसके अलावा, ईरान ने भविष्य में किसी भी अमेरिकी हमले के खिलाफ लिखित गारंटी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता का सम्मान करने की मांग की थी। हालांकि, ट्रंप के सख्त रुख ने साफ कर दिया कि अमेरिका इन शर्तों के आगे झुकने को तैयार नहीं है। अमेरिका का तर्क है कि पहले पूरी तरह से युद्धविराम हो, उसके बाद ही परमाणु कार्यक्रम जैसे विवादित मुद्दों पर कोई चर्चा की जाएगी।
कच्चे तेल के दाम बढ़े और पाकिस्तान की मध्यस्थता
ट्रंप के इस कड़े फैसले का असर पूरी दुनिया के बाजारों पर देखने को मिला। जैसे ही डील कैंसिल होने की खबर आई, इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें करीब 3 डॉलर प्रति बैरल तक उछल गईं। इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी चर्चा में रही। दरअसल, पाकिस्तान इस जंग में मध्यस्थ (Mediator) के तौर पर काम कर रहा है और उसी ने ईरान का यह संदेश अमेरिका तक पहुंचाया था। हालांकि, पाकिस्तान की तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों देशों के बीच की खाई कम होती नहीं दिख रही है और शांति का रास्ता फिर से भटक गया है।
खाड़ी देशों में ड्रोन का साया और एलएनजी जहाज की आवाजाही
एक तरफ जहाँ कूटनीतिक बातचीत फेल हो रही है, वहीं दूसरी तरफ खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में सैन्य हलचल तेज हो गई है। रविवार को सीजफायर के दावों के बीच यूएई, कतर और कुवैत के ऊपर कई संदिग्ध ड्रोन देखे गए। यूएई ने दो ड्रोन को मार गिराने का दावा किया, जबकि कतर ने अपने समुद्री क्षेत्र में एक जहाज पर हुए हमले की कड़ी निंदा की। इसी तनाव के बीच एक राहत भरी खबर भी आई जब कतर एनर्जी का एक एलएनजी गैस जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर पाकिस्तान के पोर्ट कासिम के लिए रवाना हुआ। बताया जा रहा है कि जंग शुरू होने के बाद पहली बार ईरान की मंजूरी से कोई गैस जहाज इस रास्ते से गुजरा है, जिसे भरोसे की बहाली की एक छोटी कोशिश माना जा रहा है।

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