पंचकूला प्लॉट आवंटन मामला: पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के खिलाफ CBI ने दाखिल की चार्जशीट, नियमों में फेरबदल के आरोप

पंचकूला: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पंचकूला औद्योगिक भूखंड आवंटन मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अन्य आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है। सीबीआई ने चार्जशीट के साथ हरियाणा सरकार द्वारा केस चलाने के लिए दी गई आधिकारिक मंजूरी भी अदालत को सौंप दी है।

भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप

दायर की गई चार्जशीट में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि हुड्डा ने मुख्यमंत्री और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के अध्यक्ष रहते हुए अपने करीबियों को आर्थिक लाभ पहुँचाने के लिए पद का दुरुपयोग किया।

नियमों को ताक पर रखकर आवंटन

चार्जशीट के अनुसार, साल 2016 में दर्ज इस मामले की जांच में सामने आया है कि:

  • 14 औद्योगिक भूखंडों के लिए आवेदन की समय-सीमा समाप्त होने के बाद नियमों में बदलाव किया गया।

  • चहेतों को फायदा पहुँचाने के लिए अनुभव और वित्तीय क्षमता के अंकों को घटाकर 'वाइवा-वॉइस' (मौखिक परीक्षा) के अंक 15 से बढ़ाकर 25 कर दिए गए।

  • बाजार भाव के अनुसार 30.34 करोड़ रुपये के भूखंडों को मात्र 7.85 करोड़ रुपये में आवंटित कर दिया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी चपत लगी।

आरोपियों की सूची में कई बड़े नाम

सीबीआई ने पूर्व सीएम हुड्डा के अलावा कई पूर्व अधिकारियों और उनके करीबियों को नामजद किया है:

  • धर्मपाल सिंह नांगल: पूर्व आईएएस और एचएसवीपी के तत्कालीन मुख्य प्रशासक।

  • सुभाष चंद्र कांसल: पूर्व मुख्य वित्तीय नियंत्रक।

  • बीबी तनेजा: पूर्व उप अधीक्षक।

  • इसके अलावा हुड्डा के ओएसडी, निजी सचिव के रिश्तेदार, उनके सहपाठी के बेटे और पैतृक गांव के निवासियों सहित कुल 14 आवंटियों को आरोपी बनाया गया है।

अगली सुनवाई 4 जून को

अदालत ने संबंधित विभाग को दस्तावेजों की जांच करने के निर्देश दिए हैं और इस मामले में अगली रिपोर्ट 4 जून को पेश की जानी है। सीबीआई ने एक गवाह के बयान भी सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपे हैं। फिलहाल, कुछ आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत अंतिम मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।