चंडीगढ़। हरियाणा के पंचकूला से लेकर यमुनानगर स्थित कलेसर जंगल क्षेत्र तक खैर के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला एक हाईप्रोफाइल ग्रीन सिंडिकेट के रूप में सामने आया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं बल्कि लंबे समय से सक्रिय एक संगठित नेटवर्क है, जो सुनियोजित तरीके से वन संपदा को नुकसान पहुंचा रहा था। यमुनानगर के दारपुर क्षेत्र से हिमाचल सीमा तक फैले जंगलों में बड़े पैमाने पर पेड़ों के कटान के ठोस प्रमाण मिले हैं। पंचकूला के आसरेवाला जंगल, मोरनी-पिंजौर क्षेत्र के जंगलों के साथ दारपुर की मेन खोह, कुई वाली खोह, छोटी वाली खोह, चिकन की खोह, खिलना वाली खोह, कांसली, बागपत, खादरी, टिबरियों, आमवाली, नंगली और फलोड़ी तक कई स्थानों पर खैर के पेड़ों के कटे अवशेष, ताजा ठूंठ और अवैध रास्तों के निशान मिले हैं। इससे वन विभाग के अंदरूनी नेटवर्क पर शक गहरा रहा है।

आसरेवाला से खुला पूरा खेल

दो मार्च 2026 को पंचकूला के आसरेवाला जंगल क्षेत्र में खैर की तस्करी का मामला उजागर होने के बाद पूरे प्रदेश में हलचल मच गई। इसके बाद वन विभाग और पंचकूला पुलिस की एसआईटी ने संयुक्त अभियान शुरू किया। जांच आगे बढ़ी और तब से लेकर अब तक एक वन दरोगा समेत 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

पांच अधिकारी निलंबित, सात और रडार पर

खैर के पेड़ों की अवैध कटान में वन विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में है। इस मामले में अब तक पांच अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। इनमें दो डीएफओ, दो इंस्पेक्टर और एक अन्य कर्मचारी शामिल है। वहीं पांच फॉरेस्टर और दो रेंजर्स की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, जिन पर जल्द कार्रवाई हो सकती है। विभागीय स्तर पर संभावित मिलीभगत और निगरानी में कमी की जांच की जा रही है।

सवाल : आला अधिकारियों पर मेहरबानी क्यों?

इतने बड़े पैमाने पर अवैध कटाई के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। लंबे समय तक इस नेटवर्क की जानकारी न होना विभागीय निगरानी पर सवाल खड़ा करता है। बड़े स्तर पर कार्रवाई न होना भी जांच को और गंभीर बना रहा है।

अधिकारी के अनुसार

इस मामले की लगातार निगरानी की जा रही है। जिन अधिकारियों की लापरवाही या संलिप्तता सामने आई है, उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की गई है। एसआईटी भी सक्रिय है और दोषियों को किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा।

-राव नरबीर सिंह, वन मंत्री, हरियाणा।