ऑपरेशन म्यूल हंटर के तहत साइबर गैंग का भंडाफोड़, ATM कार्ड बरामद
जयपुर: राजस्थान की राजधानी में साइबर अपराधियों के विरुद्ध पुलिस प्रशासन ने एक निर्णायक प्रहार करते हुए ठगों के एक व्यापक नेटवर्क को ध्वस्त करने में सफलता प्राप्त की है। पुलिस कमिश्नरेट के वेस्टर्न जोन में संचालित 'म्यूल हंटर अभियान' के अंतर्गत विभिन्न थाना क्षेत्रों में एक साथ छापेमारी की गई, जिसके परिणामस्वरूप कुल तेईस शातिर अपराधियों को दबोचा गया है। इसके अतिरिक्त पांच अन्य संदिग्धों को भी बीएनएस की सुसंगत धाराओं के तहत हिरासत में लिया गया है, जो इस संगठित अपराध तंत्र का हिस्सा बनकर आम जनता की गाढ़ी कमाई को निशाना बना रहे थे।
फर्जी खातों का मकड़जाल और ठगी के आधुनिक तरीके
पुलिस की गहन जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि अपराधी फर्जी बैंक खातों, जिन्हें म्यूल अकाउंट्स कहा जाता है, के माध्यम से करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन को अंजाम दे रहे थे। यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी विज्ञापनों का सहारा लेकर लोगों को अपने झांसे में लेता था और ऑनलाइन सट्टा ऐप्स के माध्यम से युवाओं को भारी मुनाफे का लालच देकर निवेश कराता था। इसके साथ ही ओएलएक्स और फेसबुक जैसे लोकप्रिय डिजिटल मंचों पर सामान बेचने के बहाने लोगों से अग्रिम भुगतान लेने के बाद ये अपराधी अपने मोबाइल नंबर बंद कर देते थे, जिससे पीड़ितों के पास शिकायत का कोई सीधा जरिया नहीं बचता था।
एस्कॉर्ट सर्विस और डिजिटल सेवाओं के नाम पर धोखाधड़ी
जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि इस नेटवर्क के सदस्य केवल सामान बेचने तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे ई-मित्र एजेंसी दिलाने और एस्कॉर्ट सर्विस जैसी भ्रामक सेवाओं के नाम पर भी भोले-भले लोगों को अपना शिकार बना रहे थे। ऑपरेशन म्यूल हंटर का मुख्य उद्देश्य उन बैंक खातों की पहचान कर उन्हें बंद करना था जिनका उपयोग ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जा रहा था। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने अपराधियों के कब्जे से पचास मोबाइल फोन, सिम कार्ड, कई एटीएम कार्ड और बैंक पासबुक सहित भारी मात्रा में तकनीकी उपकरण और नकदी बरामद की है, जो इस गिरोह की सक्रियता के पुख्ता प्रमाण हैं।
साइबर सेल की बड़ी उपलब्धि और पीड़ितों को राहत
साइबर सेल और वेस्टर्न जोन पुलिस ने पिछले दो महीनों के दौरान तकनीकी कुशलता का परिचय देते हुए दो सौ से अधिक चोरी या गुम हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों तक पहुंचाए हैं, जिनकी बाजार में कीमत लगभग चालीस लाख रुपये आंकी गई है। जनवरी से लेकर अब तक की गई कार्रवाई में पुलिस ने साइबर ठगी के करीब पौने चार करोड़ रुपये अपराधियों के खातों में फ्रीज करवाए हैं और एक करोड़ पैंतीस लाख रुपये की राशि पीड़ितों को वापस दिलाने में सफलता हासिल की है। फिलहाल पुलिस की टीमें इस गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों और उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की तलाश में जुटी हुई हैं ताकि साइबर अपराध की इस जड़ को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके।

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