झारखंड विधानसभा ब्रेकिंग: 7,721 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश! जानें किन विभागों को मिला सबसे ज्यादा फंड?
झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में आज वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए द्वितीय अनुपूरक बजट पेश किया गया. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 7 हजार 721 करोड़ और 25 लाख रुपये का द्वितीय अनुपूरक बजट पेश किया. इसके बाद सदन की कार्यवाही को मंगलवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया. दरअसल, सोमवार को सदन की कार्यवाही की हंगामेदार शुरुआत हुआ.
विपक्ष ने विधानसभा भवन की सीढ़ियों पर नारेबाजी की. सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्षी विधायक वेल में पहुंच गए. यहां भी लगातार नारेबाजी की. प्रश्नकाल पर भी हंगामा हुआ तो स्पीकर रबींद्रनाथ महतो ने कहा कि यदि हंगामा ही करना है तो फिर सर्वदलीय और कार्य मंत्रणा समिति की बैठक का कोई अर्थ नहीं है. उन्होंने विपक्षी विधायकों पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया.
हालांकि, जब विधायक नहीं माने तो सदन की कार्यवाही को पहले 12 बजे तक के लिए स्थगित किया गया. दोबारा सदन की कार्यवाही शुरू होने पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने धान खरीद का मामला उठाया. बीजेपी के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने बताया कि सदन में विपक्ष सरार को स्कॉलरशिप नहीं देने, परीक्षा शुल्क बढ़ाने और धान खरीद में देरी पर घेरेगा.
छात्रवृत्ति रोकने से लाखों विद्यार्थियों पर संकट
हटिया विधानसभा से बीजेपी के विधायक नवीन जायसवाल ने कहा कि परीक्षा शुल्क में असामान्य वृद्धि करके सरकार ने छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है जबकि छात्रवृत्ति रोकने से लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई संकट में है.
उन्होंने कहा कि धान खरीद में देरी से किसानों में नाराजगी है. गौरतलब है कि विपक्षी दल की बैठक में कहा गया कि केंद्र सरकार पिछले वर्षों में राज्य को 12 लाख पीएफसी ब्लॉक आवंटित कर चुकी है. लेकिन राज्य सरकार के उदासीन रवैये की वजह से इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सका है. बीजेपी नेताओं का आरोप है कि सरकार केवल घोषणाएं करती है जबकि धरातल पर उसे उतारने में नाकामयाब रही है.
विभागों के 13,400 करोड़ की मांग पर भारी कटौती
गौरतलब है कि अनुपूरक बजट पेश होने से पहले विभागों की 13,400 करोड़ रुपये की मांग पर वित्त विभाग ने केवल 4000 करोड़ रुपये की मंजूरी दी. कहा जा रहा है कि राजस्व की कम वसूली और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसे मदों में अधिक खर्च की वजह से सरकार पर आर्थिक दबाव है. मंईयां सम्मान योजना की वजह से भी आर्थिक स्थिति खराब हुई है. सरकार दावा करती है कि केंद्र से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है.

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