नए शो ‘तुम से तुम तक’ को लेकर चर्चा में डॉली चावला
मुंबई । छोटे परदे की एक्ट्रेस डॉली चावला इन दिनों अपने नए शो ‘तुम से तुम तक’ को लेकर चर्चा में हैं। एक इंटरव्यू में डॉली ने अपने किरदार को लेकर खुलकर बात की और बताया कि मीरा उनके असली जीवन से बिल्कुल उलट है, इसलिए यह रोल निभाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा। उन्होंने बताया कि मीरा अपने बॉस आर्या की बेहद देखभाल करती है चाहे वह ऑफिस हो, दवाइयां हों या खाना वह हर चीज पर नजर रखती है। लेकिन जब ऑफिस में अनु की एंट्री होती है, तो मीरा को उससे जलन होने लगती है क्योंकि वह नहीं चाहती कि कोई और आर्या के करीब आए।
डॉली ने यह भी कहा कि दर्शकों ने हमेशा उनके काम को सराहा है और उन्हें उम्मीद है कि मीरा को भी उतना ही प्यार मिलेगा, भले ही उसके निगेटिव शेड्स हों। उनके अनुसार, हर किरदार में चुनौती होनी चाहिए तभी उसे निभाना मजेदार होता है। उन्होंने ये भी साझा किया कि मीरा को समझने और उसमें ढलने में उन्हें समय लगा, लेकिन अब वह इस किरदार को लेकर काफी उत्साहित हैं। डॉली ने यह शो साइन करने की वजह का जिक्र करते हुए बताया कि जब प्रोडक्शन हाउस से उन्हें कॉल आया, तो वह काफी खुश हुईं। उनके मुताबिक, यह प्रोडक्शन हाउस उनके लिए परिवार जैसा है और जब उन्हें मीरा का रोल ऑफर किया गया तो उन्होंने बिना देर किए हां कह दिया। चूंकि यह शो पहले ही सात भाषाओं में बन चुका है, इसलिए उन्हें परफॉर्मेंस का दबाव भी महसूस होता है, लेकिन हिंदी वर्जन को लेकर वह खासा उत्साहित हैं।
‘तुम से तुम तक’ एक ऐसी प्रेम कहानी है जो उम्र के फासले को दरकिनार करते हुए आगे बढ़ती है। डॉली का मानना है कि असल जिंदगी में भी ऐसी कहानियां होती हैं और उम्र महज एक संख्या होती है। शरद केलकर और निहारिका चौकसे के साथ डॉली इस शो में अहम भूमिका निभा रही हैं। यह शो रोजाना जी टीवी पर प्रसारित होता है। बता दें कि इस धारावाहिक में वह मीरा नाम का किरदार निभा रही हैं, जो नकारात्मक होने के बावजूद दर्शकों का ध्यान खींच रहा है।

मुख्यमंत्री के 'सुशासन' संकल्प से आ रहा बदलाव
एक्सप्रेसवे पर भीषण सड़क हादसा, ओवरटेक के दौरान 5 लोगों की दर्दनाक मौत
अधिक वजन वाली महिलाओं में बढ़ता है फाइब्रॉइड का खतरा
चुनाव नतीजों के बाद Mamata Banerjee का बयान—“हम हारे नहीं, हराए गए”
संजय राउत बोले- ममता बनर्जी ने Rahul Gandhi के साथ गलत किया
Dhar में दर्दनाक मामला, प्लास्टिक बैग में मिली बच्ची की लाश
सपनों को मिले पहिए : भीमा मारकंडे की 'बैसाखी' से 'आत्मनिर्भरता' तक की प्रेरक यात्रा