12 की रिहाई ने गरमाया सियासी माहौल, अबु आजमी बोले – जनता की भावनाओं से न खेलें
मुंबई: 2006 मुंबई लोकल ट्रेन में बम ब्लास्ट केस पर AIMIM चीफ असुदद्दीन ओवैसी की प्रतिक्रिया के बाद अब समाजवादी पार्टी के नेता अबु आसिम आजमी की प्रतिक्रिया सामने आई है। आजमी ने उन लोगों को निशाने पर लिया है जो बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। मुंबई ट्रेन ब्लास्ट के दोषियों के बरी होने पर बोलते हुए आजमी ने पुलिस पर मुसलमानों को बिना सबूत गिरफ्तार करने का आरोप लगाया। उन्होंने अफसरों पर कार्रवाई की मांग की है। 12 आरोपियों को बरी किए जाने पर आजमी ने कहा कि मेरे लिए बहुत खुशी का दिन है। मुंबई सीरियल ब्लास्ट में जिन लोगों को गिरफ्तार किया था, वे बेकसूर थे। आजमी ने कहा कि मैं पहले दिन से कह रहा था। 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेन में सीरियल ब्लास्ट हुए थे। पहला धमाका मांटुगा और आखिरी ब्लास्ट मीरा रोड पर हुआ था। मुंबई लोकल ट्रेन बम धमाकों में 12 आरोपियों के बरी होने पर महाराष्ट्र में राजनीति और गरमाने की उम्मीद है, हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली महायुति सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में इस पर 24 जुलाई को पहली सुनवाई होगी।
बहुत सारे फिरकापरस्त कह रहे हैं कि हमें यह फैसला मंजूर नहीं है। शर्म नहीं आती आपको, हाईकोर्ट का फैसला आया हुआ। जब फांसी मिली थी तो बहुत खुश हो रहे थे आप, अब सच्चाई सामने आ गई तो आपका दिल सुनने का तैयार नहीं है। देश में जानबूझकर मुसलमानों को फंसाया जा रहा है। मुझे अफसोस है कि कुछ नेता बेकसूरों के छूटने को दुर्भाग्यपूर्ण बता रहे हैं। अगर निर्दोषों को फांसी मिल जाए तो खुशी मिल जाएगी।
बेकसूरों को मिले हर्जाना
आजमी ने मांग कि पहले बहुत दिनों तक इस मामले में कोई अरेस्ट नहीं हुआ। फिर अचानक एटीएस के चीफ और डीजीपी दोनों ने कहा कि हमें सुराग मिल गया है। 19 साल तक जेल में रखा गया। 5-6 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई। आजमी ने कहा कि लंबी जद्दोजहद के बाद जब मोबाइल कॉल कॉल रिकॉर्ड में पता चला कि कोई तब पता चला कि इनमें से एक भी शख्स ट्रेन के अगल-बगल नहीं था। आजमी ने कहा कि उनकी मांग है कि सरकार को इस मामले में तुरंत एसआईटी का गठन करें। अगर ये लोग छूट गए हैं तो फिर ब्लास्ट का असल दोषी कौन है? कोई न कोई तो था, जिसने ब्लास्ट किया था। आजमी ने कहाबेकसूरों को 19 साल का हर्जाना मिलना चाहिए और इन्हें पकड़ने वाले अफसरों का कार्रवाई होनी चाहिए।
ओवैसी भी उठा चुके हैं सवाल
अबू आसिम आजमी से पहले AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने बॉम्बे हाई कोर्ट की ओर से 12 आरोपियों को बरी किए जाने के बाद सवाल उठाया था। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि क्या वह इस मामले की जांच करने वाले अपने एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। ओवैसी ने कहा था 12 मुस्लिम 19 साल तक एक ऐसे अपराध के लिए जेल में रहे जो उन्होंने नहीं किया। उनके जीवन के महत्वपूर्ण साल चले गए। 180 परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, कई घायल हुए। उन्हें कोई राहत नहीं मिली। ओवैसी ने कहा कि अक्सर निर्दोष लोग जेल में डाल दिए जाते हैं और सालों बाद बरी होने पर उनके पास अपनी जिंदगी फिर से शुरू करने का कोई रास्ता नहीं होता।

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