सिंधी भाषा दिवस पर उपराष्ट्रपती भवन मे आयोजित हुआ विशेष समारोह

 

सिंधी भाषा में भारतीय संविधान का विमोचन, सिंधी समाज के लिए ऐतिहासिक क्षण : सांसद शंकर लालवानी

 

दैनिक द लाॅयन सिटी - नई दिल्ली। सिंधी भाषा दिवस के अवसर पर, “हिंदी मेरी माँ है और सिंधी भाषा मेरी मौसी है देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व अटल बिहारी जी के उक्त वाक्य को साकार करते हुए देश की मोदी सरकार ने सिंधी समाज को एक महत्वपूर्ण सौगात प्रदान की है। सिंधी भाषा दिवस के शुभ अवसर पर नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित एक गरिमामय आयोजन में भारत के उप राष्ट्रपति श्री सी पी राधाकृष्णन ने भारत के विकास में सिन्धी समाज के योगदान की सराहना करते हुवे सिंधी भाषा( देवनागरी) में प्रकाशित भारतीय संविधान का विधिवत विमोचन किया। कार्यक्रम में केंद्रीय विधि एवं कानून मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने सिन्धी समाज की निष्ठा लगन और परोपकार की भावना से सभी को प्रेरणा लेने की बात करते हुवे सिन्धी भाषा दिवस के अवसर प्रधानमंत्री द्वारा सिन्धी समाज को दिए गए बधाई संदेश का वाचन किया गया। इंदौर के सांसद श्री शंकर लालवानी ने अपने उद्बोधन में बताया कि सिंधी समाज देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि देश की जनसंख्या का मात्र 1 प्रतिशत होने के बावजूद देश के GDP संग्रहण में लगभग 20 प्रतिशत तथा इंकमटैक्स में लगभग 24 प्रतिशत योगदान व चेरिटी में 22 प्रतिशत सिंधी समाज का रहता है, जबकि उसकी जनसंख्या मात्र 1 प्रतिशत के आसपास है। इस अवसर पर राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अपने संबोधन में सिंधी समाज के विस्थापन की से लेकर उसके सुदृढ़ होने तक के पूरे सफर का विस्तारपूर्वक उल्लेख किया। इस अवसर पर देश भर से पधारे वरिष्ठ सिन्धी समाजसेवी गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। यह ऐतिहासिक पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी तथा सिंधी भाषा और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी। इस अवसर उपराष्ट्रपति भवन में भोपाल के रेल मंत्रालय के सदस्य नितेश लाल जी, जयकिशन लालचंदानी, पूर्व जस्टिस मनोहर ममतानी, राजेश वाधवानी, मुकेश रायचंदानी, अमर दावानी, रवि आनंद, विजय पाहुजा, शामिल हुए, साथ ही समारोह में देश के लगभग 250 लोगों ने इस गरिमामय समारोह में शिरकत की।