हर घर,स्कूल मे होनी चाहिए सिन्धु जा सपूत पुस्तक - कमलेश रायचंदानी

सिन्धु जा सपूत पुस्तक ।
दैनिक द लाॅयन सिटी - संत हिरदाराम नगर - 27 मार्च संत हिरदाराम नगर के सुषीला देवी धर्मशाला में में वीना कला एवं सेवा समिति द्वारा संत नगर के सिन्धी हिन्दी अखबार सिन्धू प्रभात के संपादक एवं लेखक डाॅ नरेश वासवानी द्वारा लिखी पुस्तक का समिति अध्यक्ष राकेश शेवानी एवं साहित्यकारों द्वारा किया गया।
इस अवसर पर जनसंपर्क अधिकारी एवं लेखक अशोक मनवानी ने डाॅ नरेश वासवानी द्वारा लिखी गई पुस्तक सिन्धु जा सपूत की तारीफ की।
28 मार्च को पूज्य सिंधी पंचायत द्वारा पंचायत अध्यक्ष माधू चांदवानी, महासचिव नन्द दादलानी द्वारा डाॅ नरेश वासवानी द्वारा लिखी गई पुस्तक के लिए उन्हें शाल पहनाकर पुस्तक सिंधु का सपूत का विमोचन किया गया।
इस अवसर पर माधु चांदवानी ने बताया कि डाॅ नरेश वासवानी द्वारा लिखी पुस्तक सिन्धु जा सपूत हमारे समाज की धरोहर है। उन्होंने यह किताब लिख कर हमारे समाज को देश की आजादी की नई राह दिखाई है। यह पुस्तक हमारे आने वाली पीढ़ के लिए प्रेरणादायक रहेगी।
3 अप्रैल को दैनिक द लाॅयन सिटी समाचार-पत्र के प्रधान संपादक ओर युवा पत्रकार वेलफेयर क्लब के संस्थापक अध्यक्ष कमलेश रायचंदानी को डा नरेश वासवानी ने सिन्धु जा सपूत पुस्तक भेट की ओर बताया कि, इस पुस्तक को लिखने में 2 वषों से अधीक का परिश्रम किया है देश भर मे जा जाकर सिंधी वीरो की कथा कहानिया ओर सटीक जानकारी इकट्ठी की ताकी समझ को उनके बलिदान की सही जानकारी मिले । कमलेश रायचंदानी ने सिन्धु जा सपूत पुस्तक को माथे से लगा कर नमन करते हुऐ कहा कि, धन्य है आपकी मेहनत ओर हर घर,स्कूल मे होनी चाहिए सिन्धु जा सपूत पुस्तक ओर आज की ओर आने वाली पीढ़ीयो को इसका अध्ययन करना चाहिए ताकि उनको भी पता चलेगी हमें जो आजादी मिली है उसमें हमारे पूर्वजों का कितना बड़ा बलिदान है। अनेक महिला सेनानियों का विवरण भी पुस्तक में है जो बहुत को पता होगा वो इस पुस्तक के माध्यम से सबको पता चलेगा डॉक्टर वासवानी की सालों की मेहनत रंग लाएगी आने वाला समय इस पुस्तक के माध्यम से उनको और इस पुस्तक को याद रखेगा।
डाॅ नरेश वासवानी ने कमलेश रायचंदानी को बताया कि मुझे पुस्तक लिखने का शोक कई वषों से रहा परन्तु कुछ नया लिखने का मन था और कोई स्टोरी लिखने के लिए मन नहीं मान रहा था। एक दिन सन् 2018 में मेरे ज़हन में बात आई कि हमारे समाज में स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों पर पुस्तक क्यो न लिखी जाए। अपने मन की बात मैने अपने मित्र राज मनवानी से कही क्यों कि उनके पिता श्री पमनदास मनवानी जी स्वयं स्वतंत्रता संग्रामी थे। तब उन्होंने कहा कि है तो मुष्किल पुस्तक लिखना, पर एक इतिहास बन जाएगा। फिर क्या धीरे.धीरे कई बुजुर्ग लोगो से बात करने पर धीरे.धीरे मेरी पुस्तक का काॅरवां बनता गया। इस पुस्तक में मैंने साक्षात्कार स्वतंत्रता संग्राम सैननी से मिलक परिचय लिया है। पुस्तक को लिखने में मुझे 2 वर्ष से अधिक तक का समय लगा। मेरी यह पुस्तक लिखना मेरा सपना था जो सन 2022 में पूरा हुआ। पुस्तक पूरी लिखने के बाद मैने सिंधी साहित्य अकादमीं डायरेक्टर श्री राजेश वाधवानी जी से पुस्तक के बारे मे बात करी तो उन्होंने तुरन्त पांडुलिपि जमा करने को कहा। मैने पांडुलिपि सिंधी साहित्य अकादमी में जमा कर दी। सन 2025 में पुस्तक छापने के लिए सिंधी साहित्य अकामीं का सहयोग प्राप्त हुआ। इस तरह मेरा पुस्तक लिखने का सपना पूरा हुआ। डाॅ नरेश वासवानी ने बताया कि, इस पुस्तक में 83 स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों का जीवन परिचय चित्र सहित वणिर्त है कुल स्वतंत्रता संग्राम सैनानी 162 है। बाकी चित्र में दर्शाए गए है। उपरोक्त 83 स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों में 8 औरतें शामिल हैं। इनमें से एक स्वतंत्रता संग्रामी औरत मोहिनी देवी तो 11 बार जेल गई थी 12 बार 2 महिने की सज़ा हुई उस समय वह बच्चे की मां बनने वाली थी। एसे महान व्यक्तित्व वाले लोगों ने देश की आजादी को आजाद करने के लिए आजादी के हवन कुण्ड में आहुति दी। डाॅ नरेश वासवानी ने कमलेश रायचंदानी को बताया की पुस्तक के छपने के बाद कई लोग मेरे और संपर्क में आए हैं और सिंधी समाज के अन्य वीर सपूतों की कहानी सामने आ रही है और मैं प्रयास करूंगा कि उन सभी के बारे में जानकारी इकट्ठी कर अगली पुस्तकों में उसका वर्णन करूं। गौरतलब हो कि, इस किताब में लेखक द्वारा उन सिंधी स्वतंत्रता सेनानियों और आज़ादी के योद्वाओं का परिचय एवं कृतिव का विवरण है जो युवा पीढ़ी के लिए उपयोगी और इससे अधिकांश लोग अनजान हैं। इसमे सेनानियों के चित्र भी पुस्तक में प्रकाशित किए गए है। अनेक महिला सेनानियों का विवरण भी पुस्तक में शामिल है।