नई दिल्ली । अंधेरे में उजाले की जीत का पर्व दिवाली को करीब 20 दिन शेष है पर राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में वायु प्रदूषण की समस्या जस की तस है। ऐसे में एक बार फिर त्योहार पर ‘ग्रीन पटाखों’ का शोर सुनाई दे सकता है। उदाहरण के लिए राजस्थान सरकार ने अपना फैसला बदलते हुए केवल ग्रीन क्रैकर्स को ही अनुमति देने का फैसला किया है, जबकि दिल्ली में पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। इधर, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कुछ राज्यों से ग्रीन पटाखों को अनुमति देने की अपील की है। अब समझते हैं कि ग्रीन क्रैकर्स आखिर होते क्या हैं? सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मंजूरी हासिल कर चुके ग्रीन पटाखों से उत्सर्जन कम होता है। आम पटाखों की तुलना में इनके शेल का आकार भी कम होता है। 2017 में पटाखों और आतिशबाजियों पर लगे पूर्ण प्रतिबंध में ढील देते हुए शीर्ष अदालत ने ग्रीन क्रैकर्स की इजाजत दी थी। इन्हें काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च-नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएसआईआर-एनईईआरआई) के विशेषज्ञों ने तैयार किया है।
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जारी किए गए आदेशों के अनुसार, इन ग्रीन पटाखों को कम हानिकारक कच्चे माल से तैयार किया जाता है। इन्हें इस तरह से तैयार किया जाता है कि जलाए जाने पर ये धूल को दबाते हैं। इनमें लिथियम, आर्सेनिक, बैरियम और लेड जैसी कैमिकल्स भी नहीं होते। यह जलने पर भाप छोड़ते हैं जो धूल को उड़ने नहीं देती। हालांकि, यह भी कुछ हद तक पर्यावरण को प्रभावित करते हैं। माना जाता है कि ये ग्रीन पटाखे 30 फीसदी कम पार्टिकुलेट मैटर पॉल्युशन (पीएम) उत्सर्जित करते हैं हैं। राजस्थान सरकार ने शुक्रवार को फैसला बदला और राज्य में ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की इजाजत दी है। हालांकि, त्यौहार के दौरान केवल सीमित समय तक ही पटाखे जलाए जा सकेंगे। नए एडवाइजरी के अनुसार, दिवाली और गुरुपर्व पर ग्रीन पटाखे रात 8 बजे से रात 10 बजे तक जलाए जा सकेंगे। छठ पूजा पर यह समयसीमा सुबह 6 से 8 बजे और क्रिसमस और न्यू ईयर पर 11:55 से लेकर 12:30 बजे होगी। जिन जगहों पर एक्यूआई‘पूअर’ या इससे नीचे हैं, वहां पटाखों पर पूरी तरह बैन होगा। दिल्ली में 1 जनवरी 2022 तक पटाखे जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध होगा। आदेश के अनुसार, कई जानकारों ने कोविड-19 के मामले फिर बढ़ने की संभावना जताई है। तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और ओडिशा के समकक्षों से ग्रीन पटाखों की बिक्री पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है। इसके बाद राजस्थान ने नियमों में ढील दी थी।